भारत में स्कूल शिक्षा को एक समग्र और समावेशी रूप देने के लिए केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है समग्र शिक्षा अभियान। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के हर बच्चे को प्री-स्कूल से लेकर कक्षा 12 तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समग्र शिक्षा उपलब्ध कराने का एक ठोस प्रयास है।
2026 का साल इस योजना के लिए खास है क्योंकि इसका वर्तमान चरण 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है और उसके बाद समग्र शिक्षा 3.0 के रूप में नया संस्करण आने वाला है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह योजना क्या है, इसके उद्देश्य क्या हैं, इसमें क्या-क्या काम हो रहे हैं और आने वाले समय में इसमें क्या बदलाव होने वाले हैं।
समग्र शिक्षा अभियान क्या है?
समग्र शिक्षा अभियान को 2018-19 में शुरू किया गया था। इससे पहले देश में तीन अलग-अलग योजनाएं चल रही थीं — सर्व शिक्षा अभियान (प्राथमिक शिक्षा के लिए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (माध्यमिक शिक्षा के लिए) और शिक्षक शिक्षा। इन तीनों को मिलाकर एक ही छतरी के नीचे लाया गया ताकि स्कूल शिक्षा को टुकड़ों में न देखा जाए बल्कि प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जाए।
इस योजना का मूल मंत्र है — शिक्षा को समग्र बनाना। यानी बच्चे को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि उसके समग्र विकास (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक) पर ध्यान देना।
वर्तमान चरण (2021-2026) और समयसीमा
कैबिनेट ने इस योजना को 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी थी। इस चरण के लिए कुल अनुमानित खर्च ₹2,94,283 करोड़ रखा गया था।
अभी जून 2026 चल रहा है, यानी योजना का यह चरण अपने अंतिम महीनों में है। सरकार पहले से ही अगले चरण की तैयारी में जुट चुकी है।
समग्र शिक्षा 3.0: 2026-27 से नया अध्याय
जनवरी 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में राज्यों और विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें समग्र शिक्षा 3.0 के रोडमैप पर चर्चा हुई।
इस नए चरण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब फोकस इनपुट (पैसे, बिल्डिंग, किताबें) से हटकर आउटपुट (बच्चों के सीखने के परिणाम) पर होगा। NEP 2020 के पांच साल पूरे होने के बाद और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह नया रूप तैयार किया जा रहा है।
नए चरण में मुख्य जोर इन बातों पर होगा:
- बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy)
- शिक्षकों की क्षमता निर्माण
- डिजिटल इनोवेशन (AI सहित)
- पाठ्यक्रम में समानता
- स्कूलों को समाज के साथ जोड़ना
- पोषण और सीखने के बीच संबंध (PM POSHAN के साथ तालमेल)
योजना के मुख्य उद्देश्य
समग्र शिक्षा अभियान के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और सीखने के परिणामों में सुधार करना
- सामाजिक, लैंगिक और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना
- लड़कियों, SC/ST, अल्पसंख्यकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए समावेशन सुनिश्चित करना
- RTE एक्ट 2009 को प्रभावी ढंग से लागू करना
- व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना ताकि बच्चे स्कूल के बाद रोजगार के लिए तैयार हों
- SCERT और DIET जैसी संस्थाओं को मजबूत करना
- शिक्षक और तकनीक — इन दो स्तंभों पर विशेष ध्यान
समग्र शिक्षा के प्रमुख घटक
यह योजना बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:
1. पहुंच और बुनियादी ढांचा, स्कूलों का उन्नयन, नए स्कूल खोलना, छात्रावास, परिवहन सुविधा।
2. बुनियादी साक्षरता और गणित (NIPUN Bharat) 3 से 9 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए विशेष अभियान।
3. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) प्री-स्कूल स्तर पर मजबूत नींव।
4. लैंगिक समानता और समावेशन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहायक सामग्री।
5. गुणवत्ता और नवाचार, बहुभाषीय शिक्षा, कला-एकीकृत शिक्षण, 21वीं सदी के कौशल।
6. डिजिटल पहल स्मार्ट क्लासरूम, ICT लैब, DIKSHA प्लेटफॉर्म।
7. व्यावसायिक शिक्षा कक्षा 9 से 12 तक व्यावसायिक कोर्स, NEP 2020 के अनुसार।
8. शिक्षक प्रशिक्षण इन-सर्विस ट्रेनिंग, TET, SCERT और DIET को मजबूत करना।
9. RTE अधिकार: मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सुविधाएं (कई जगहों पर DBT के माध्यम से)।
केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न
यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है। फंडिंग का अनुपात इस प्रकार है:
- 90:10 — 8 पूर्वोत्तर राज्य + 3 हिमालयी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर)
- 60:40 — अन्य राज्य
- 100% केंद्र — बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के लिए यह अनुपात बहुत अनुकूल है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में स्कूलों तक पहुंच, शिक्षकों का प्रशिक्षण और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने में राज्य को काफी मदद मिलती है।
2026-27 का बजट
केंद्रीय बजट 2026-27 में समग्र शिक्षा के लिए ₹42,100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से अधिक है। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार Annual Work Plan & Budget (AWP&B) बनाते हैं और Project Approval Board (PAB) से मंजूरी लेते हैं।
योजना का दायरा
यह योजना पूरे देश में लागू है। लगभग 11.6 लाख सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल, 15.6 करोड़ से अधिक छात्र और 57 लाख शिक्षक इसके दायरे में आते हैं।
कार्यान्वयन की व्यवस्था
राष्ट्रीय स्तर पर गवर्निंग काउंसिल और प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड काम देखते हैं। राज्य स्तर पर एक ही State Implementation Society (SIS) के माध्यम से पूरी योजना चलाई जाती है। निगरानी के लिए PRABANDH पोर्टल, UDISE+, Performance Grading Index (PGI) और National Achievement Survey (NAS) जैसे उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं।
आधिकारिक पोर्टल
- राष्ट्रीय पोर्टल: samagra.education.gov.in
- मॉनिटरिंग पोर्टल: prabandh.samagrashiksha.in
- UDISE+: udiseplus.gov.in
- हिमाचल प्रदेश: samagrashiksha.hp.gov.in
छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के लिए फायदे
अगर आप हिमाचल प्रदेश या किसी अन्य राज्य के अभिभावक हैं, तो इस योजना से आपके बच्चे को कई लाभ मिल सकते हैं — बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, मुफ्त किताबें-यूनिफॉर्म, व्यावसायिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहायता।
स्कूल स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, स्मार्ट क्लास और लैब जैसी सुविधाएं भी इसी योजना के अंतर्गत आती हैं।
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